उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 से पहले चुनावी माहौल गर्माने लगा है। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने एक अहम आदेश जारी किया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आयोग ने जिला स्तर पर मौजूद चुनाव अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि पंचायत से जुड़े डाटा में जो भी गड़बड़ियां हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए। इस आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में प्रवेश कर रही हैं।
डाटा में गड़बड़ी कैसे सामने आई
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को भेजी गई सूचना में बताया है कि पंचायती राज विभाग की ओर से दिए गए आंकड़ों और आयोग के पोर्टल पर दर्ज जानकारी में अंतर पाया गया है। खास तौर पर सदस्य ग्राम पंचायत और सदस्य क्षेत्र पंचायत के आंकड़ों में विसंगतियां सामने आई हैं। इसी कारण आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा है।
जिला अधिकारियों को क्या करना होगा
आयोग के निर्देश के मुताबिक, अब हर जिले में ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत से जुड़ी सभी सूचनाओं का मिलान किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि पंचायती राज विभाग से मिली जानकारी और आयोग के पोर्टल पर अपलोड डाटा एक जैसा है या नहीं। जहां भी अंतर मिलेगा, उसे सही करके पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। आयोग का साफ कहना है कि बिना शुद्ध डाटा के चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।
क्यों जरूरी है डाटा की शुद्धता
चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि डाटा की शुद्धता चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए बेहद जरूरी है। अगर ग्राम पंचायत या क्षेत्र पंचायत से जुड़ी जानकारी गलत रहती है, तो इससे परिसीमन, नामांकन और चुनावी परिणाम तक प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से आयोग ने इस काम को प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए हैं।
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चुनाव की टाइमलाइन पर भी नजर
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव इस साल अप्रैल या मई में कराए जा सकते हैं। पूरी चुनावी प्रक्रिया करीब दो महीने तक चलने की संभावना है। ऐसे में आयोग चाहता है कि चुनाव से पहले सभी तकनीकी और प्रशासनिक कमियां दूर कर ली जाएं, ताकि बाद में किसी तरह का विवाद न हो।
राजनीतिक दलों की बढ़ी सक्रियता
पंचायत चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल भी धीरे-धीरे मैदान में उतरने लगे हैं। गांव स्तर पर बैठकों और समीकरणों पर काम शुरू हो चुका है। आयोग के इस आदेश को भी इसी तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। साफ है कि आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति और ज्यादा रफ्तार पकड़ने वाली है।