उत्तर प्रदेश में घरेलू रसोई गैस व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब पाइपलाइन गैस यानी PNG को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य में हर दिन करीब 2000 नए PNG कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जिससे साफ है कि सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
LPG और PNG साथ रखने पर रोक
नई अधिसूचना के अनुसार अब कोई भी उपभोक्ता एक साथ LPG सिलेंडर और PNG कनेक्शन नहीं रख सकेगा। जिन लोगों के पास दोनों सुविधाएं हैं, उन्हें LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। इतना ही नहीं, PNG लेने के बाद भविष्य में LPG सिलेंडर का रिफिल भी नहीं मिल सकेगा। यह नियम उन इलाकों में लागू होगा जहां पाइपलाइन गैस की सुविधा पहले से मौजूद है।
तीन महीने में खत्म होगी LPG सप्लाई
सरकार ने इस बदलाव के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की है। जिन उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन उपलब्ध है, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस मिलने के तीन महीने के भीतर उन्हें LPG कनेक्शन वापस करना होगा। यदि तय समय में ऐसा नहीं किया गया, तो संबंधित पते पर LPG की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।
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प्रदेश में CGD कंपनियां सक्रिय
उत्तर प्रदेश में इस योजना को लागू करने के लिए करीब 12 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां काम कर रही हैं। इन कंपनियों ने कई जिलों में पाइपलाइन नेटवर्क तैयार कर लिया है और अब घर-घर PNG पहुंचाने का काम तेज कर दिया गया है। मोहल्लों और अपार्टमेंट्स में जाकर लोगों को इस नई सुविधा के बारे में जानकारी भी दी जा रही है।
PNG क्यों बन रहा बेहतर विकल्प
सरकार का मानना है कि PNG गैस LPG के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है। इसमें सिलेंडर बदलने की झंझट नहीं होती और 24 घंटे गैस की आपूर्ति मिलती है। इसके अलावा लीकेज का खतरा भी कम होता है, जिससे सुरक्षा के लिहाज से यह बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले का असर सीधे उन लोगों पर पड़ेगा जो अभी दोनों कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं। उन्हें अब एक विकल्प चुनना होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। आने वाले समय में यह बदलाव राज्य में गैस वितरण प्रणाली को पूरी तरह बदल सकता है और ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइपलाइन गैस पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।