स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में जूडो में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं।
यूपी पुलिस के लिए गर्व का पल
अस्मिता डे वर्तमान में गाजियाबाद कमिश्नरेट में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि हासिल करने के बाद पूरे यूपी पुलिस महकमे में उत्साह का माहौल है। उनकी सफलता को अनुशासन, मेहनत और समर्पण की मिसाल बताया जा रहा है।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने दी बधाई
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अस्मिता डे को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस, राज्य और देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि अस्मिता ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया है कि अनुशासन, दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफलता हासिल की जा सकती है।
मुख्यमंत्री की खेल नीति का मिला लाभ
डीजीपी ने इस सफलता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खेल प्रोत्साहन नीति से भी जोड़ते हुए कहा कि खेल कोटे के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को यूपी पुलिस में अवसर देने की नीति सकारात्मक परिणाम दे रही है। इससे खिलाड़ी नौकरी के साथ खेलों में भी देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
बधाइयों का लगा तांता
अस्मिता डे की ऐतिहासिक जीत के बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट, यूपी पुलिस के अधिकारियों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर भी उनकी उपलब्धि की जमकर सराहना हो रही है और लोग इसे भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक पल बता रहे हैं।
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संघर्ष से सफलता तक का सफर
अस्मिता डे की यह सफलता केवल एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का परिणाम है। पुलिस सेवा और खेल दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाते हुए उन्होंने यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों और पुलिस कर्मियों के लिए प्रेरणा बन गई है।