ग्लासगो में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में यशवीर सिंह ने अपने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का थ्रो कर इतिहास रच दिया। आखिरी थ्रो से पहले वह पदक की दौड़ से बाहर नजर आ रहे थे, लेकिन दबाव के बीच उन्होंने अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। इस प्रदर्शन के साथ भारत ने जैवलिन में दो पदक अपने नाम किए। नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीता।
भिवानी के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर
यशवीर सिंह का जन्म 22 अक्टूबर 2001 को हरियाणा के भिवानी जिले के देवसर गांव में हुआ। खेल की प्रेरणा उन्हें परिवार से ही मिली। उनके पिता राय सिंह राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं और रेलवे में कोच भी रहे। अपने खेल करियर में सही मार्गदर्शन न मिलने का अफसोस उनके पिता को हमेशा रहा। इसी वजह से उन्होंने बेटे को बेहतर प्रशिक्षण देकर अपना अधूरा सपना पूरा करने का फैसला किया।
14 साल की उम्र से शुरू हुई मेहनत
साल 2015 में महज 14 वर्ष की उम्र में यशवीर ने अपने पिता की देखरेख में जैवलिन थ्रो की ट्रेनिंग शुरू की। रन-अप, ग्रिप और रिलीज तकनीक पर लगातार मेहनत की। उनकी मेहनत का असर जल्द ही दिखाई देने लगा। उन्होंने अंडर-18 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लगातार दो बार स्वर्ण पदक जीता और युवा स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
नीरज का रिकॉर्ड तोड़कर आए चर्चा में
यशवीर ने भारतीय अंडर-20 फेडरेशन कप में नीरज चोपड़ा का पुराना मीट रिकॉर्ड तोड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। वर्ष 2022 में उन्होंने पहली बार 80 मीटर का आंकड़ा पार किया और जून 2026 में 83.72 मीटर का थ्रो कर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाई किया।
पहले ही कॉमनवेल्थ में जीता मेडल
अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में यशवीर ने बड़े मंच पर शानदार प्रदर्शन किया। अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उनका यह थ्रो न केवल उनके करियर का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन बना, बल्कि भारत के लिए डबल पोडियम भी सुनिश्चित कर गया।
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पिता का सपना हुआ पूरा
यशवीर सिंह की सफलता सिर्फ एक पदक की कहानी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और पिता-पुत्र के साझा सपने की जीत है। जिस मुकाम तक उनके पिता खुद नहीं पहुंच सके, वहां बेटे ने देश के लिए पदक जीतकर उनका सपना पूरा कर दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ब्रॉन्ज भारतीय जैवलिन के भविष्य के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।