उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को मसौदा मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में कुल 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता शामिल हैं, जबकि इससे पहले मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ 44 लाख से अधिक थी। यानी करीब 2 करोड़ 89 लाख नाम इस बार की ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए हैं। इतने बड़े स्तर पर वोट कटने से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सीईओ नवदीप रिणवा ने बताए पूरे आंकड़े
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 27 अक्टूबर को जारी पिछली मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 नाम थे। SIR के पहले चरण के बाद यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख 55 हजार 984 रह गई है। कुल 18.70 प्रतिशत मतदाता इस ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो सके हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया सूची को ज्यादा शुद्ध और अपडेट बनाने के लिए की गई है।
क्यों हटाए गए इतने बड़े पैमाने पर नाम
जारी आंकड़ों के अनुसार 46 लाख 23 हजार 796 मतदाता मृत पाए गए। इसके अलावा 2 करोड़ 57 लाख से ज्यादा लोग या तो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए थे या सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले। वहीं 25 लाख 47 हजार मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इन सभी कारणों को मिलाकर लगभग 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
लखनऊ समेत बड़े शहरों में सबसे ज्यादा कटौती
SIR रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा 12 लाख से अधिक वोट कटे हैं। इसके बाद प्रयागराज, कानपुर नगर, गाजियाबाद, मेरठ और आगरा जैसे बड़े शहरों में भी लाखों नाम सूची से बाहर हुए हैं। शहरी इलाकों में प्रवासी आबादी और बार-बार पते बदलने की वजह से वोट कटने का प्रतिशत ज्यादा रहा है, जिस पर राजनीतिक दल खास नजर बनाए हुए हैं।
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6 जनवरी से 6 फरवरी तक मिलेगा सुधार का मौका
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, वे फॉर्म भरकर नाम जुड़वा सकते हैं या उसमें सुधार करा सकते हैं। सभी आपत्तियों और दावों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, ताकि अंतिम सूची पूरी तरह सही हो सके।
2027 के चुनाव से पहले क्यों अहम है यह सूची
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने से 2027 के विधानसभा चुनाव पर सीधा असर पड़ सकता है। सभी दल यह आकलन करने में जुटे हैं कि कटौती किन इलाकों और किन वर्गों में ज्यादा हुई है। अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को जारी होगी और तभी साफ होगा कि कितने नाम वापस जुड़े और कितने हमेशा के लिए बाहर रह गए।