पिछले एक दशक में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। कभी छोटे-छोटे भुगतान के लिए नकदी और खुले पैसों पर निर्भर रहने वाले लोग अब मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में लेन-देन कर रहे हैं। चाय, किराना और सब्जी जैसी छोटी खरीदारी से लेकर बड़े भुगतान तक, यूपीआई अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
यूपीआई के जरिए करीब 2 करोड़ लेन-देन हुए
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में जहां यूपीआई के जरिए करीब 2 करोड़ लेन-देन हुए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 24,000 करोड़ से अधिक हो गई। इसी अवधि में यूपीआई के जरिए हुए लेन-देन का कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी भारत में डिजिटल भुगतान के तेजी से विस्तार को दर्शाती है।
दो रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन
आज भारत रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल है। दावा है कि दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन में से एक भारत में होता है। जुलाई 2026 में ही यूपीआई पर 2,360 करोड़ से अधिक लेन-देन दर्ज किए गए। खास बात यह है कि डिजिटल भुगतान अब केवल बड़े कारोबार या महंगे सामान की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे से छोटे भुगतान के लिए भी लोग यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत बताई
आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के 86 प्रतिशत मर्चेंट भुगतान 500 रुपए से कम के हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि डिजिटल भुगतान किस तरह छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। देश के कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत बताई गई है। पुष्प विहार इलाके के दुकानदार जयकिशन ने बताया कि यूपीआई आने के बाद छोटे दुकानदारों की कई परेशानियां कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि पहले खुदरा पैसे की समस्या बनी रहती थी, लेकिन अब ग्राहक डिजिटल माध्यम से पूरी रकम का भुगतान कर देते हैं। यूपीआई ने छोटे दुकानदारों की काफी मदद की है।”
ग्राहकों को काफी सहूलियत है
दुकानदार मनोज कुमार ने भी यूपीआई को बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई काफी उपयोगी है। ग्राहकों को काफी सहूलियत है। खुदरे की समस्या से निजात मिली है। छोटी से छोटी पेमेंट अब यूपीआई से हो जाती है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकार की पहल काफी प्रशंसनीय है।
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