भारत में UPI को लॉन्च हुए करीब एक दशक हो चुका है और आज यह रोजमर्रा के भुगतान का सबसे बड़ा डिजिटल माध्यम बन गया है। सरकार ने 1 जनवरी 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को शून्य कर दिया था। इससे छोटे-बड़े दुकानदारों के लिए UPI भुगतान स्वीकार करना मुफ्त हो गया। अब बैंकों और फिनटेक कंपनियों की लागत को देखते हुए चुनिंदा बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू करने की चर्चा तेज हो गई है।
आम आदमी पर क्या असर?
फिलहाल UPI से भुगतान करने वाले आम ग्राहकों के लिए कोई शुल्क लागू नहीं हुआ है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि MDR का बोझ व्यापारियों पर होगा। यानी व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजने या छोटे दुकानदारों को भुगतान करने पर ग्राहक से सीधे शुल्क लेने की बात नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक MDR लागू करने या उसकी दर तय करने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इस पर संबंधित समिति विचार करेगी।
बड़े पेमेंट पर नजर
चर्चा के मुताबिक भविष्य में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन को MDR के दायरे में लाया जा सकता है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। सरकार का तर्क है कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को UPI के विशाल नेटवर्क, सर्वर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे पर होने वाले खर्च को संभालने में मदद मिल सकती है।
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PhonePe-GPay को फायदा?
ब्रोकरेज फर्म Jefferies के अनुमान के मुताबिक अगर बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.15 से 0.30 प्रतिशत तक MDR लगाया जाता है तो पेमेंट एग्रीगेटर्स की कमाई बढ़ सकती है। PhonePe, Google Pay और Paytm जैसी कंपनियों को इससे अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। हालांकि वास्तविक फायदा कितना होगा, यह शुल्क की दर, किन लेनदेन पर लागू होता है और रकम किस तरह बांटी जाती है, इस पर निर्भर करेगा।
अमेरिका का एंगल क्या?
इस बहस में अमेरिकी दबाव का मुद्दा भी उठ रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की 2026 नेशनल ट्रेड एस्टिमेट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि अमेरिका ने UPI और RuPay जैसे भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि घरेलू पेमेंट सिस्टम विदेशी कंपनियों को समान अवसर नहीं देते। दूसरी ओर, GTRI का कहना है कि भारत को अपनी डिजिटल भुगतान नीति किसी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं बदलनी चाहिए।
Visa-Mastercard को कैसे फायदा?
UPI पर MDR लागू होने की स्थिति में इसका असर कार्ड पेमेंट बाजार पर भी पड़ सकता है। अभी व्यापारी कई मामलों में कार्ड के बजाय मुफ्त UPI को प्राथमिकता देते हैं, जबकि क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर MDR पहले से लागू है। अगर UPI के कुछ बड़े लेनदेन पर भी शुल्क लगता है तो दोनों डिजिटल पेमेंट माध्यमों के बीच लागत का अंतर कम हो सकता है। इससे Visa और Mastercard जैसे कार्ड नेटवर्क को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि फिलहाल MDR की अंतिम दर और दायरा तय नहीं हुआ है, इसलिए इसे निश्चित बदलाव के बजाय संभावित परिदृश्य के तौर पर देखना चाहिए।