UPI MDR Charge : 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR यानी ट्रांजैक्शन चार्ज लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार की नई अधिसूचना को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अंजन दत्ता ने इस व्यवस्था को संविधान में दिए गए समानता और व्यापार के अधिकार के खिलाफ बताया है।
याचिका में क्या उठाए गए सवाल?
याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार ने इस फैसले को लागू करने से पहले पर्याप्त चर्चा नहीं की। साथ ही जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अतिरिक्त शुल्क का बोझ उठाना होगा।
डिजिटल पेमेंट पर पड़ सकता है असर
याचिका में यह भी कहा गया है कि अगर UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगना शुरू हुआ तो कई ग्राहक और व्यापारी फिर से नकद लेनदेन की तरफ लौट सकते हैं। इससे देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिशों को झटका लग सकता है। याचिकाकर्ता ने इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए भी चुनौती बताया है।
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सरकार की नई व्यवस्था क्या कहती है?
सरकार ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी (Customer to Merchant) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का फैसला किया है। हालांकि आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (Person to Person) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
किस भुगतान पर कितना चार्ज लगेगा?
नई व्यवस्था के अनुसार 3,000 रुपये के भुगतान पर व्यापारी को 12 रुपये MDR देना होगा। वहीं 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये का तय MDR रखा गया है। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
UPI चार्ज को लेकर देशभर में बहस जारी है। एक तरफ सरकार और पेमेंट इंडस्ट्री इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाने वाला कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ व्यापारी संगठन और उपभोक्ता समूह इसका विरोध कर रहे हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर करोड़ों UPI यूजर्स और लाखों व्यापारियों पर पड़ सकता है।