UPI MDR Fee Impact : यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ी बात कही है। उन्होंने बुधवार को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद कहा कि मामूली शुल्क लगने से यूपीआई लेनदेन की संख्या पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। उनके मुताबिक, फिलहाल लेनदेन की मात्रा में कोई गिरावट दिखाई नहीं दे रही है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया शुल्क
राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी एनपीसीआई के नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर से चुनिंदा कारोबारी यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर लागू होगा। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर तय किया गया है। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा, बल्कि व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लागू होगा।
ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा बोझ
नए नियम का असर मुख्य रूप से व्यापारियों और यूपीआई भुगतान से जुड़े तंत्र पर पड़ेगा। ग्राहकों को इस एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। 2,000 रुपये तक के भुगतान और छोटे कारोबारियों के लिए शून्य एमडीआर वाली व्यवस्था जारी रहेगी। 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
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RBI को लेनदेन घटने की चिंता नहीं
संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी तक यूपीआई लेनदेन की मात्रा में कोई कमी नहीं देखी गई है। उन्होंने माना कि शुल्क मामूली है और इससे डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब 15 अक्टूबर से नई एमडीआर व्यवस्था लागू होने वाली है और इसे लेकर व्यापारियों तथा भुगतान कंपनियों के बीच चर्चा चल रही है।
बैंक कर्ज और अर्थव्यवस्था पर भी बोले
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंकों की कर्ज वृद्धि आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे व्यापक आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलेगा। उन्होंने अतिरिक्त बैंकिंग नकदी के बीच गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की संपत्ति गुणवत्ता पर संभावित असर की निगरानी की बात भी कही। मल्होत्रा ने कहा कि हाल की अतिरिक्त नकदी लंबे समय तक बनी रहने की संभावना नहीं है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत करीब 133 अरब डॉलर की जमा राशि जुटने को देश की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति का संकेत बताया और भरोसा जताया कि भुगतान संतुलन जल्द ही अधिशेष में लौट सकता है।