अमेरिका में मेडिकल कॉस्ट लगातार बढ़ती जा रही है और अब यह देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, हेल्थकेयर पर होने वाला खर्च अमेरिका की जीडीपी का करीब 11.6 फीसदी तक पहुंच गया है। साल 2012 के बाद से इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च लगभग दोगुना हो चुका है। तीसरी तिमाही में हेल्थकेयर सर्विसेज पर 3.6 ट्रिलियन डॉलर खर्च हुए, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
इलाज और दवाओं पर बढ़ते खर्च की वजह से अमेरिकी नागरिकों की इनकम का करीब 17 फीसदी हिस्सा सिर्फ हेल्थकेयर पर खर्च हो रहा है। साल 2000 में यह आंकड़ा 13.5 फीसदी था, यानी दो दशकों में इसमें तेज बढ़ोतरी हुई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पैसे की कमी के चलते कई लोग जरूरी इलाज तक टालने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले सालों में यह संकट और गहरा सकता है।
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2026 में बदलेंगे हेल्थकेयर के नियम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2026 अमेरिका के हेल्थकेयर सिस्टम के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। कुछ लोगों को राहत मिल सकती है, जबकि कई लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पहली बार मेडिकेयर को यह अधिकार मिलेगा कि वह महंगी दवाओं की कीमतों पर सीधे कंपनियों से बातचीत कर सके। इससे बुजुर्गों और मेडिकेयर पर निर्भर लोगों को दवाओं के खर्च में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
किसे फायदा, किसे झटका
हालांकि राहत सभी के लिए नहीं है। अफोर्डेबल केयर एक्ट (ACA) के तहत मिलने वाली टैक्स सब्सिडी खत्म होने वाली है और मेडिकेड के फंड में भी भारी कटौती की जा रही है। इससे कम आय वाले और राज्य सहायता पर निर्भर लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। साफ तौर पर देखा जाए तो मेडिकेयर से जुड़े लोगों के लिए 2026 कुछ राहत लेकर आ सकता है, लेकिन ACA और मेडिकेड पर निर्भर लोगों के लिए आगे का रास्ता मुश्किल भरा हो सकता है।