Motion Against Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिससे वॉशिंगटन की राजनीति में हलचल तेज हो गई। टेक्सास के डेमोक्रेट सांसद अल ग्रीन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा ने दूसरी बार खारिज कर दिया। सदन में 237-140 मतों से प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस साल यह दूसरा मौका है जब ग्रीन की कोशिश नाकाम हुई, हालांकि इस बार पहले की तुलना में डेमोक्रेट सदस्यों में समर्थन बढ़ता हुआ दिखाई दिया। मतदान से पहले हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ ने कहा कि महाभियोग के लिए विस्तृत जांच जरूरी है, जिसे रिपब्लिकन बहुमत ने अब तक शुरू नहीं किया।
ट्रंप पर आरोप और नया प्रस्ताव
अल ग्रीन ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में गंभीर संवैधानिक उल्लंघन किए हैं। उनके पिछले प्रस्ताव में ट्रंप पर कांग्रेस को दरकिनार कर ईरान पर कार्रवाई का आरोप था। नए प्रस्ताव में दावा किया गया कि ट्रंप ने सोशल मीडिया वीडियो के माध्यम से सैनिकों को अवैध आदेश मानने से इनकार करने को कहा और कांग्रेस के डेमोक्रेट सदस्यों को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाया। ग्रीन का कहना है कि यह आचरण कांग्रेस, न्यायपालिका और प्रशासनिक संस्थाओं की सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए महाभियोग जरूरी है। हालांकि, सदन में रिपब्लिकन बहुमत ने इसे खारिज कर दिया।
मिड-टर्म चुनावों से बढ़ सकती हैं ट्रंप की चिंताएं
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी उन पर दो बार महाभियोग लगाया गया था, लेकिन दोनों बार सीनेट ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। रिपब्लिकन आरोप लगा रहे हैं कि डेमोक्रेट्स 2025 के मिड-टर्म चुनावों को देखते हुए महाभियोग को राजनीतिक हथियार बनाना चाहते हैं। वहीं डेमोक्रेट नेतृत्व का कहना है कि महाभियोग केवल विस्तृत जांच के आधार पर ही आगे बढ़ेगा, न कि राजनीतिक प्रतिशोध के तौर पर। पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर अगले चुनाव में बहुमत मिला तो ट्रंप प्रशासन की कड़ी जांच जरूर होगी, लेकिन बिना ठोस सबूत किसी बड़े कदम की संभावना कम है।