करीब साढ़े तीन महीने तक चले अमेरिका-ईरान तनाव के बाद अब शांति समझौते की उम्मीद बढ़ गई है। अगर प्रस्तावित समझौते पर मुहर लगती है, तो इसका असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश को भी इससे बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है।
तेल आपूर्ति सामान्य होने का फायदा
युद्ध के दौरान तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग पर संकट का असर भारत पर भी पड़ा। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए सप्लाई सामान्य होने से तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
पेट्रोल-डीजल पर मिल सकती है राहत
कच्चे तेल की कीमतें कम होने का सबसे सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो भारत में भी ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे आम लोगों और कारोबारियों दोनों को राहत मिलने की संभावना है।
एलपीजी और गैस सिलेंडर होंगे प्रभावित
भारत एलपीजी के लिए भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। युद्ध के दौरान शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने से गैस आयात महंगा हो गया था। समझौते के बाद इन खर्चों में कमी आने पर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
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खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं सस्ती
डीजल की कीमतों का असर खेती, कोल्ड स्टोरेज और माल ढुलाई पर पड़ता है। जब परिवहन लागत घटती है, तो सब्जियों, फलों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव कम होता है। इससे खाद्य महंगाई में राहत मिल सकती है।
हवाई यात्रियों को मिल सकता है फायदा
एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) होता है। कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर ATF भी सस्ता हो सकता है। ऐसे में एयरलाइंस यात्रियों को सस्ते टिकट या आकर्षक ऑफर दे सकती हैं, जिससे हवाई सफर थोड़ा किफायती हो सकता है।
रोजमर्रा के सामान की लागत घट सकती है
साबुन, डिटर्जेंट, प्लास्टिक पैकेजिंग, कॉस्मेटिक्स, हेयर ऑयल और कई घरेलू उत्पाद पेट्रोकेमिकल्स पर आधारित होते हैं। तेल सस्ता होने से इन उत्पादों की निर्माण लागत कम हो सकती है। इसका असर आगे चलकर बाजार कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
किसानों और लोन लेने वालों को भी राहत
तेल और गैस की कीमतों में नरमी से खाद, कीटनाशक और खेती से जुड़े कई खर्च कम हो सकते हैं। वहीं महंगाई घटने पर ब्याज दरों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की ईएमआई पर भी राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।