अमेरिका ने अपने कई व्यापारिक साझेदार देशों के आयात पर नया अतिरिक्त टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। इस फैसले से पाकिस्तान और भारत समेत कई देशों के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। पाकिस्तान को जहां आर्थिक मदद की उम्मीद थी, वहीं उसे अतिरिक्त आयात शुल्क का सामना करना पड़ा।
पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगी थी आर्थिक मदद
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर (करीब 96 हजार करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया था। बताया गया कि यह राशि विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और आर्थिक दबाव कम करने के उद्देश्य से मांगी गई थी। हालांकि, इस सहायता पर कोई सकारात्मक घोषणा नहीं हुई।
मदद के बजाय लगा अतिरिक्त टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान समेत कई देशों के कुछ आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू करने का फैसला किया। इससे पाकिस्तान के कपड़ा और चमड़ा उद्योग जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका इन उत्पादों का बड़ा बाजार माना जाता है।
भारत भी नए फैसले के दायरे में
अमेरिका के इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सटाइल, जेम्स एंड जूलरी और आईटी जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों पर लागू टैरिफ की दरें उनकी श्रेणी के अनुसार तय की गई हैं।
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अमेरिका ने क्या दी वजह?
अमेरिका का कहना है कि कुछ देशों में श्रम मानकों के उल्लंघन और सस्ते श्रम के कारण उत्पादों की लागत कम रहती है, जिससे अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है। इसी आधार पर कई देशों के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया गया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में पाकिस्तानी उत्पाद महंगे होते हैं, तो उनकी मांग प्रभावित हो सकती है। इससे निर्यात, विदेशी मुद्रा आय और पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त असर पड़ने की संभावना है।
व्यापारिक रिश्तों पर रहेगी नजर
अमेरिका के इस फैसले के बाद अब भारत, पाकिस्तान और अन्य प्रभावित देशों की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी। आने वाले समय में व्यापारिक बातचीत, निर्यात नीतियों और वैश्विक बाजार की स्थिति तय करेगी कि इन नए टैरिफ का वास्तविक आर्थिक प्रभाव कितना व्यापक होता है।