Middle East War: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी संस्था यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन, ईरान को सैन्य और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। इस दावे के बाद वैश्विक राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
ड्रोन और मिसाइल
रिपोर्ट के अनुसार चीन ईरान को ड्रोन, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और रॉकेट ईंधन बनाने से जुड़ी तकनीक उपलब्ध करा रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि चीन से भेजे गए कुछ रसायनों का इस्तेमाल मिसाइल ईंधन तैयार करने में किया जा सकता है, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
रणनीति में बदलाव के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पहले सीधे सैन्य सहयोग से बचता था और केवल दोहरे उपयोग (ड्यूल यूज) तकनीक तक सीमित रहता था। लेकिन रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि अब उसकी रणनीति बदल रही है और वह रक्षा क्षेत्र में अधिक सक्रिय सहयोग कर रहा है। साथ ही चीन का बेइडोउ नेविगेशन सिस्टम भी ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
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आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी मजबूत
दोनों देशों के बीच संबंध केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे तक फैले हुए हैं। वर्ष 2021 में चीन और ईरान के बीच 25 साल का दीर्घकालिक समझौता हुआ था, जिसके तहत कई क्षेत्रों में निवेश और सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
वैश्विक मंचों पर बढ़ती नजदीकी
ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों पर भी चीन और ईरान की नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। ऐसे में इस रिपोर्ट ने मिडिल ईस्ट के हालात को और संवेदनशील बना दिया है और दुनिया भर की नजर अब इस पर बनी हुई है।