गुरुवार देर रात आई एक रिपोर्ट ने ग्लोबल बाजारों में हलचल मचा दी। चर्चा है कि अमेरिका डॉलर को मजबूत करने की रणनीति के तहत रूस के साथ संभावित आर्थिक समझौते की दिशा में बढ़ रहा है। अगर यह डील आकार लेती है तो शेयर बाजारों का सेंटिमेंट सुधर सकता है, लेकिन सोने-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स पर दबाव बढ़ सकता है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से बढ़ी हलचल
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित आर्थिक साझेदारी के तहत डॉलर सेटलमेंट सिस्टम में वापसी पर विचार कर रहे हैं। यदि रूस फिर से डॉलर आधारित लेनदेन में लौटता है, तो इसका मतलब होगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार डॉलर में हो सकता है। 2022 में पश्चिमी प्रतिबंधों और SWIFT सिस्टम से हटाए जाने के बाद यह बड़ा बदलाव माना जाएगा।
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सोना-चांदी में क्यों आई तेज गिरावट
जैसे ही यह खबर सामने आई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4% और चांदी 8% से ज्यादा टूट गई। घरेलू वायदा बाजार में भी भारी गिरावट देखी गई। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा और फेड रेट कटौती की उम्मीदों के कमजोर पड़ने ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। डॉलर मजबूत होने की संभावना से निवेशकों ने सेफ एसेट्स से पैसा निकालना शुरू किया।
डील में किन सेक्टरों पर फोकस
रिपोर्ट के अनुसार संभावित समझौते में जीवाश्म ईंधन, प्राकृतिक गैस, तेल और महत्वपूर्ण कच्चे माल जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस हो सकता है। अगर रूस दोबारा डॉलर आधारित व्यापार में लौटता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संतुलन बदल सकता है। फिलहाल रूस चीन और भारत के साथ लगभग 90% व्यापार स्थानीय मुद्रा में कर रहा है, जबकि ब्रिक्स देशों में भी लोकल करेंसी सेटलमेंट बढ़ा है।
आगे क्या असर दिख सकता है
यदि यह डील आगे बढ़ती है, तो डॉलर की मजबूती से वैश्विक पूंजी प्रवाह शेयर बाजारों की ओर मुड़ सकता है। इससे सोना-चांदी में और करेक्शन देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सिर्फ संकेत भर से ही बाजारों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल चुका है।