मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तेल संकट के बीच अमेरिका का रुख अब बदला हुआ नजर आ रहा है। पहले जहां रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका भारत सहित कई देशों की आलोचना करता था, वहीं अब वही खरीद जरूरी बताई जा रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों के बयान से यह साफ दिखाई दे रहा है कि वैश्विक तेल संकट ने कई देशों की नीतियों को प्रभावित किया है। खासतौर पर ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत की भूमिका को बताया अहम
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में भारत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। उनके मुताबिक भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के बड़े तेल उपभोक्ताओं और रिफाइनर देशों में शामिल है, इसलिए ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए भारत और अमेरिका का सहयोग जरूरी है।
ट्रंप ने भी दिए नए संकेत
तेल संकट को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल के दिनों में कुछ संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि तेल की कमी से बचने के लिए अमेरिका कुछ देशों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। उनके बयान के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या अमेरिका रूस के तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से कम कर सकता है। ट्रंप का कहना है कि मौजूदा हालात में दुनिया में तेल की सप्लाई बनाए रखना जरूरी है।
ये भी पढ़ें : Iran के तेल संकट की चेतावनी के बीच 32 देश एकजुट, IEA के फैसले से दुनिया को मिली बड़ी राहत
होर्मुज जलडमरूमध्य ने बढ़ाई चिंता
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस इलाके में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और कई देशों को ऊर्जा संकट की चिंता सता रही है। ऐसे में वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए बड़े देशों को नई रणनीति बनानी पड़ रही है।
पहले भारत पर लगाए गए थे भारी शुल्क
गौरतलब है कि कुछ समय पहले तक अमेरिका भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर नाराजगी जताता रहा है। इस मुद्दे को लेकर भारत पर भारी शुल्क भी लगाया गया था। उस समय अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि रूस से तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की आर्थिक मदद करना है। इसी वजह से भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला लिया गया था।
अब बदलते हालात में बदल रही नीति
हालांकि अब वैश्विक हालात बदल चुके हैं और तेल संकट के कारण अमेरिका की नीति में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता को ध्यान में रखते हुए कई देशों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। मौजूदा परिस्थितियों में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि उसकी खरीद वैश्विक तेल बाजार को संतुलित रखने में मदद कर सकती है।