India China Trade Link : अमेरिका की एक नई रिपोर्ट ने भारत समेत कई देशों के जरिए चीन से जुड़े कथित ट्रांसशिपमेंट को लेकर सवाल खड़े किए हैं। व्हाइट हाउस ने 13 अगस्त को ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ नाम से रिपोर्ट जारी की। इसमें दावा किया गया कि अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीन से आने वाले सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका पहुंचाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत, मैक्सिको और वियतनाम के जरिए करीब 67 अरब डॉलर का सामान ट्रांसशिप किया गया। हालांकि, भारत की हिस्सेदारी कितनी थी, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। किसी भारतीय निर्यातक या खास शिपमेंट की पहचान भी नहीं की गई।
भारत को जोखिम वाले देशों में रखा
अमेरिकी रिपोर्ट में भारत को कनाडा, यूरोपीय संघ, इजरायल, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ ज्यादा जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट में री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग और मामूली प्रोसेसिंग के जरिए सामान के मूल देश को बदलकर दिखाने जैसी गतिविधियों की आशंका जताई गई है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI का कहना है कि सिर्फ व्यापार के आंकड़ों से यह साबित नहीं किया जा सकता कि भारत से अमेरिका जाने वाला सामान वास्तव में चीन का माल है जिसे दूसरे रास्ते से भेजा गया है।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सवाल
GTRI ने पंप और कंप्रेसर जैसी कुछ उत्पाद श्रेणियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के पास इन क्षेत्रों में अपना मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बेस है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने दुनिया को बड़ी मात्रा में लिक्विड पंप, एयर पंप और गैस कंप्रेसर का निर्यात किया। थिंक टैंक के मुताबिक चीन से आने वाले कंपोनेंट या इंटरमीडिएट गुड्स का इस्तेमाल भारतीय कंपनियां घरेलू उत्पादन में कर सकती हैं। अगर भारत में पर्याप्त प्रोसेसिंग, असेंबली, फिनिशिंग या वैल्यू एडिशन होता है, तो केवल चीनी इनपुट मौजूद होने से पूरा उत्पाद चीन का नहीं माना जा सकता।
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टैरिफ से बदला सप्लाई नेटवर्क
GTRI ने अमेरिका के चीन से आयात और दूसरे देशों से बढ़ते आयात के आंकड़ों को भी अलग नजरिए से देखने की बात कही है। उसके मुताबिक 2017 से 2025 के बीच अमेरिका का चीन से आयात घटा, लेकिन इसी अवधि में अमेरिका का कुल आयात बढ़ा। इसका मतलब यह हो सकता है कि अमेरिकी कंपनियों ने चीन पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने के बजाय अपने सप्लाई सोर्स बदल दिए। भारत, मैक्सिको और वियतनाम जैसे देशों से बढ़ता निर्यात इसी वैश्विक सप्लाई चेन बदलाव का हिस्सा भी हो सकता है।
अब जांच की बढ़ेगी चुनौती
अमेरिका ने संदिग्ध शिपमेंट की पहचान के लिए नए टूल विकसित करने और AI आधारित सिस्टम के इस्तेमाल की बात कही है। इसका उद्देश्य घोषित मूल देश, रूटिंग और सामान में इस्तेमाल हुए कंपोनेंट से जुड़ी विसंगतियों का पता लगाना है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए जांच, शिपमेंट में देरी और अतिरिक्त शुल्क का जोखिम बढ़ सकता है। खासकर वे कंपनियां चिंता में आ सकती हैं जो चीनी कंपोनेंट इस्तेमाल करके भारत में बड़े स्तर पर वैल्यू एडिशन करती हैं। भारत के सामने अब चुनौती यह साबित करने की है कि वैध मैन्युफैक्चरिंग और अवैध ट्रांसशिपमेंट में साफ अंतर किया जाए। GTRI ने भी कहा है कि किसी भारतीय निर्यातक पर कार्रवाई से पहले खास शिपमेंट, लेनदेन और वास्तविक वैल्यू एडिशन से जुड़े ठोस सबूत जरूरी होंगे।