Uttarakhand High Court: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें वकीलों और मुकदमेबाजों के बीच जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस तरह का निर्देश जारी करना हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को सभी आवश्यक मंजूरियां छह सप्ताह के भीतर पूरी करने और संबंधित भूमि हाई कोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया।
छह सप्ताह में पूरी हों सभी औपचारिकताएं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के नए परिसर के निर्माण से जुड़ी सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार छह सप्ताह के अंदर आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान करे और निर्माण कार्य के लिए भूमि औपचारिक रूप से हाई कोर्ट को हस्तांतरित करे, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।
2022 के कैबिनेट फैसले से शुरू हुआ था मामला
उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट ने वर्ष 2022 में हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गोलापार क्षेत्र में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, मई 2024 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि प्रस्तावित भूमि का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है और वहां पेड़ों की कटाई उचित नहीं होगी। इसके साथ ही अदालत ने सरकार को वैकल्पिक भूमि तलाशने और वकीलों व आम लोगों की राय लेने के लिए ऑनलाइन जनमत संग्रह कराने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट बार एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
हाई कोर्ट ने गिनाई थीं नैनीताल की चुनौतियां
अपने पहले के आदेश में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि नैनीताल में ट्रैफिक जाम, सीमित चिकित्सा सुविधाएं, कमजोर कनेक्टिविटी, ऊंचा रहन-सहन खर्च और वकीलों के लिए आवास की कमी जैसी कई व्यावहारिक समस्याएं मौजूद हैं। इसके अलावा, दूरदराज के जिलों से आने वाले मुकदमेबाजों को भी लंबी यात्रा और अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है। इन्हीं कारणों से हाई कोर्ट को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर विचार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से परियोजना का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हल्द्वानी में उत्तराखंड हाई कोर्ट के नए परिसर के निर्माण का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत जनमत संग्रह कराने का निर्देश उचित नहीं था। अब राज्य सरकार निर्धारित समय के भीतर आवश्यक स्वीकृतियां पूरी कर परियोजना को आगे बढ़ाएगी, जिससे भविष्य में हाई कोर्ट के स्थानांतरण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।