दूसरे यूथ वनडे में जैसे ही टीम इंडिया के कप्तान वैभव सूर्यवंशी क्रीज पर उतरे, माहौल पूरी तरह बदल गया। पिछले मैच की नाकामी का बोझ उनके चेहरे पर नहीं, बल्कि बल्ले में दिखा। पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर उन्होंने साफ कर दिया कि आज कोई हिसाब बाकी नहीं रहेगा। विदेशी धरती पर खेलते हुए वैभव ने आत्मविश्वास और आक्रामकता का ऐसा मेल दिखाया, जिसने साउथ अफ्रीका के गेंदबाजों को शुरुआत में ही दबाव में डाल दिया। स्टैंड्स में बैठे दर्शक भी समझ गए थे कि कुछ बड़ा होने वाला है।
19 गेंदों में अर्धशतक, छक्कों की बरसात
वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 19 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर दिया और वो भी छक्के के साथ। 46 रन पर लगाए गए उस सिक्स ने न सिर्फ स्कोरबोर्ड हिलाया, बल्कि अफ्रीकी खेमे में खामोशी भी भर दी। इस छोटी लेकिन विस्फोटक पारी में उन्होंने 10 छक्के और एक चौका जड़ा। गेंदबाज बदलते रहे, फील्ड बदली गई, लेकिन हर योजना नाकाम साबित हुई। 24 गेंदों पर 68 रन की इस पारी ने मुकाबले की दिशा और दशा दोनों तय कर दी।
एक छक्का, रुका खेल, नहीं रुके तेवर
इस पारी का सबसे हैरान करने वाला पल तब आया, जब वैभव का एक छक्का सीधे मैदान से बाहर चला गया। गेंद इतनी दूर गई कि उसे ढूंढना मुश्किल हो गया और कुछ देर के लिए खेल रोकना पड़ा। अंपायर से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक सभी परेशान दिखे, लेकिन गेंद बदली तो भी वैभव का अंदाज नहीं बदला। अगली ही गेंद पर फिर छक्का पड़ा। यही वो क्षण था जब अफ्रीकी कप्तान के चेहरे पर चिंता साफ दिखी और गेंदबाजों का आत्मविश्वास टूटता नजर आया।
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ओपनिंग साझेदारी और कप्तानी की छाप
वैभव ने ओपनिंग में साथी बल्लेबाज के साथ मिलकर तेज शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए अहम साझेदारी निभाई। भले ही साझेदार जल्दी आउट हो गए, लेकिन तब तक भारत मजबूत स्थिति में पहुंच चुका था। वैभव का विकेट गिरने तक नुकसान हो चुका था। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने भी दबाव बनाए रखा और साउथ अफ्रीका की पूरी टीम ढाई सौ के आसपास सिमट गई। इस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने यह दिखा दिया कि अगर कप्तान क्रीज पर टिक गया, तो विपक्ष के लिए वापसी की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।