न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादवेंद्र सिंह स्टेडियम में एलिमिनेटर मुकाबले से पहले हर कोई अपने काम में व्यस्त था। खिलाड़ी वॉर्मअप कर रहे थे, कैमरे सेट हो रहे थे, माहौल धीरे-धीरे बन रहा था। तभी गुलाबी जर्सी पहने 15 साल का वैभव सूर्यवंशी मैदान पर उतरा। चेहरे पर न कोई घमंड, न स्टार बनने का अहसास। कुछ देर बाद उसकी नजर सुनील गावस्कर पर पड़ी और वह तुरंत दौड़कर उनके पास पहुंचा। झुककर पैर छुए। फिर संजय बांगड़ को भी सम्मान दिया। यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग कहने लगे कि बिहार का यह लड़का सिर्फ क्रिकेट नहीं, संस्कार भी साथ लेकर आया है।
संस्कारों वाला बच्चा लेकिन मैदान में बवंडर
मैदान के बाहर शांत और विनम्र दिखने वाला यही बच्चा कुछ देर बाद सनराइजर्स हैदराबाद के गेंदबाजों पर कहर बनकर टूटा। पैट कमिंस जैसे बड़े गेंदबाज के खिलाफ लगातार छक्के उड़ने लगे। 16 गेंदों में फिफ्टी और सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन। पूरा स्टेडियम दंग रह गया। लेकिन सबसे खास बात यह रही कि इतनी बड़ी पारी खेलने के बाद भी वैभव के चेहरे पर न घमंड था, न कोई आक्रामक जश्न। यही चीज लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है कि जिस उम्र में बच्चे शोहरत देखकर बदल जाते हैं, उस उम्र में वैभव अभी भी बड़ों का सम्मान करना नहीं भूले।
परिवार की सीख मैदान पर दिख रही है
वैभव की हर हरकत में उनके परिवार की परवरिश साफ दिखाई देती है। बिहार के छोटे शहर से निकलकर IPL जैसे बड़े मंच तक पहुंचने के बावजूद उनके व्यवहार में सादगी बनी हुई है। यही वजह है कि लोग उनकी बल्लेबाजी जितनी पसंद कर रहे हैं, उतना ही उनके संस्कारों की भी तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगातार लोग लिख रहे हैं कि क्रिकेट को सिर्फ बड़ा खिलाड़ी नहीं, अच्छा इंसान भी मिल गया है।
गेंदबाजों के लिए डर, फैंस के लिए प्रेरणा
मैच के दौरान वैभव ने जिस तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं, उसने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। लेकिन मैच खत्म होने के बाद भी चर्चा सिर्फ उनके शॉट्स की नहीं थी। लोग उस वीडियो की भी बात कर रहे थे, जिसमें वह गावस्कर के पैर छूते नजर आए। यही वजह है कि अब वैभव सिर्फ एक युवा बल्लेबाज नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनते जा रहे हैं।
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क्रिकेट को मिला नया सितारा
15 साल की उम्र में 65 छक्के, रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड और करोड़ों लोगों का प्यार… लेकिन इसके बावजूद जमीन से जुड़े रहना आसान नहीं होता। वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत शायद यही है कि वह मैदान में तूफान बनते हैं, लेकिन मैदान के बाहर वही संस्कारी और शांत बच्चा बने रहते हैं। यही कारण है कि अब पूरा देश सिर्फ उनकी बल्लेबाजी नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व का भी फैन बन चुका है।