Valley of Flowers : अगर आप पहाड़, हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों के बीच कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स आपके लिए शानदार जगह हो सकती है। चमोली जिले में स्थित यह नेशनल पार्क हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसा है. यहां मानसून के दौरान पूरा इलाका अलग-अलग रंगों के फूलों से भर जाता है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार, यहां फूलों की 600 से ज्यादा प्रजातियां मिलती हैं, जबकि मानसून में 500 से अधिक किस्मों के फूल देखने को मिल सकते हैं.
जुलाई से सितंबर तक दिखता है सबसे खूबसूरत नजारा
वैली ऑफ फ्लावर्स घूमने के लिए जुलाई से सितंबर का समय खास माना जाता है. इस दौरान यहां फूल पूरी तरह खिलने लगते हैं और हरे मैदान रंगीन कालीन जैसे नजर आते हैं. इस इलाके की ऊंचाई करीब 3,600 मीटर है, इसलिए मौसम और रास्ते दोनों पहाड़ी होते हैं.
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दिल्ली से कैसे पहुंचें?
दिल्ली से यात्रा शुरू करने वाले लोग पहले देहरादून या ऋषिकेश पहुंच सकते हैं. इसके बाद सड़क मार्ग से जोशीमठ होते हुए गोविंदघाट जाना होता है. उत्तराखंड पर्यटन के एक सुझाए गए यात्रा कार्यक्रम के मुताबिक, देहरादून से गोविंदघाट की करीब 310 किलोमीटर की सड़क यात्रा में लगभग 10 से 11 घंटे लग सकते हैं। यही वजह है कि दिल्ली से लगातार सफर करने पर करीब 12 घंटे या उससे अधिक का समय लगना परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
असली सफर गोविंदघाट के बाद शुरू होता है
गोविंदघाट से आगे सड़क खत्म होने के बाद ट्रेक करना पड़ता है। यहां से घांघरिया पहुंचना होता है, जो वैली ऑफ फ्लावर्स का बेस कैंप है. इसके बाद घांघरिया से करीब 4 किलोमीटर का ट्रेक करके फूलों की घाटी पहुंचा जा सकता है.
ट्रेक पर जाने से पहले रखें ध्यान
यह सामान्य पिकनिक वाली जगह नहीं है, इसलिए आरामदायक जूते, रेनकोट, गर्म कपड़े, पानी और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहतर है. वैली के अंदर रात में ठहरने की अनुमति नहीं है और पर्यटकों को शाम तक घांघरिया लौटना होता है.