दिल्ली-एनसीआर में साल बदलते जा रहे हैं, लेकिन हवा की हालत नहीं सुधर रही। सर्दी, कोहरा और प्रदूषण मिलकर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। इसे रोकने के नाम पर कभी जनरेटर बंद कराए जाते हैं, कभी बसों की एंट्री रोकी जाती है और अब सीधे गाड़ियों पर पाबंदी लगाई जा रही है। BS-3 और BS-4 गाड़ियों को सड़कों से हटाया जा रहा है, जिससे सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई प्रदूषण की जड़ यही हैं या इसके पीछे कोई और एजेंडा छिपा है।
BS कैटेगरी क्या है, जिसे आधार बनाया गया
सरकार ने प्रदूषण के नाम पर गाड़ियों को BS-3, BS-4 और BS-6 श्रेणियों में बांटा है। BS-3 वे गाड़ियां हैं जो 2010 से पहले बनीं और पुराने मानकों पर आधारित हैं। BS-4 में 2017 से 2020 के बीच बनी गाड़ियां आती हैं। मौजूदा समय में BS-6 मानक लागू हैं, जिन्हें ज्यादा पर्यावरण अनुकूल बताया जाता है। दिल्ली-एनसीआर में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल गाड़ियों पर रोक लगाकर इन्हें प्रदूषण का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान क्यों
इस फैसले का सबसे बड़ा असर मिडिल क्लास पर पड़ रहा है। ज्यादातर लोग लोन और EMI पर गाड़ियां खरीदते हैं, जिन्हें चुकाने में 7-8 साल लग जाते हैं। ऐसे में 5-10 साल में ही गाड़ी को “पुरानी” घोषित कर देना लोगों को मजबूर कर रहा है कि वे नई गाड़ी खरीदें। दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो के अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत ऐसी नहीं कि लोग पूरी तरह निजी वाहन छोड़ सकें। रोज कैब पर निर्भर रहना भी हर किसी के लिए संभव नहीं है।
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क्या सच में गाड़ियां प्रदूषण की बड़ी वजह हैं
IIMC के प्रोफेसर और मार्केट एक्सपर्ट शिवाजी सरकार के मुताबिक, गाड़ियों से निकलने वाला प्रदूषण कुल प्रदूषण का एक प्रतिशत से भी कम है। विदेशों में 30-40 साल पुरानी गाड़ियां आराम से चल रही हैं, लेकिन भारत में उन्हें जबरन रिटायर किया जा रहा है। उनका कहना है कि कंपनियां पुरानी गाड़ियों को खरीदकर उनके पार्ट्स रीसाइकिल कर नई गाड़ियों में इस्तेमाल करती हैं, जिससे उन्हें भारी मुनाफा होता है।
कॉरपोरेट को फायदा, सिस्टम पर सवाल
आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में दिल्ली में 8 लाख से ज्यादा नई गाड़ियां बिकी हैं। इससे ऑटो कंपनियों को 30 से 90 प्रतिशत तक ज्यादा फायदा हो रहा है, जबकि आम आदमी पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सच में प्रदूषण कम करना है तो गाड़ियों पर रोक लगाने के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत किया जाना चाहिए। बेहतर बस सेवा, ज्यादा रूट और आसान कनेक्टिविटी ही स्थायी समाधान हो सकता है। फिलहाल प्रदूषण के नाम पर गाड़ियों को निशाना बनाना एकतरफा कदम माना जा रहा है।