दुनिया में सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार वेनेजुएला के पास है। इस देश के पास करीब 303 अरब बैरल तेल मौजूद है जिसकी कीमत हजारों अरब डॉलर में आंकी जाती है। इसी ताकत को देखकर चीन ने सालों पहले वेनेजुएला को कर्ज के जाल में फंसा लिया। चीन ने भारी रकम उधार दी और बदले में कर्ज की वसूली तेल से होने लगी। धीरे धीरे वेनेजुएला का तेल चीन की प्यास बुझाने का सबसे बड़ा जरिया बन गया।
अमेरिका की एंट्री से बदला खेल
अब इस पूरे खेल में अमेरिका की एंट्री ने सब कुछ उलट दिया है। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर सख्त नियंत्रण कर लिया है। इसका सीधा असर चीन पर पड़ा है। जो तेल पहले कर्ज चुकाने के लिए चीन जाता था वह अब दूसरी जगहों पर भेजा जा रहा है। इससे चीन को बड़ा झटका लगा है क्योंकि वह वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल खरीदार था।
चीन और वेनेजुएला की गहरी दोस्ती
पिछले कई सालों में वेनेजुएला चीन का भरोसेमंद रणनीतिक साथी बन गया था। ऊर्जा वित्त रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हुए। साल 2023 में इन रिश्तों को हर मौसम की रणनीतिक साझेदारी का नाम दिया गया। अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद चीन लगातार वेनेजुएला के साथ खड़ा रहा और तेल के बदले कर्ज की वसूली करता रहा।
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कितना है चीन का बकाया कर्ज
वेनेजुएला पर चीन का सटीक कर्ज बताना आसान नहीं है। साल 2017 के बाद से वेनेजुएला ने कर्ज का भुगतान रोक दिया था। रिसर्च एजेंसियों के मुताबिक साल 2000 से 2018 के बीच चीन ने वेनेजुएला को करीब 106 अरब डॉलर का कर्ज दिया। 2017 में यह बकाया करीब 44 अरब डॉलर था। अब अलग अलग अनुमान हैं जिनके मुताबिक मौजूदा बकाया 10 से 15 अरब डॉलर के बीच हो सकता है।
तेल से कैसे चुकाया जा रहा था कर्ज
वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी के सूत्र बताते हैं कि चीन ने कुछ साल पहले मूलधन चुकाने में राहत दी थी। इसके बदले वेनेजुएला रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल चीन भेज रहा था। इस तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे एक ऐसे खाते में जाता था जिस पर चीन का नियंत्रण था। उसी खाते से कर्ज की रकम काट ली जाती थी।
अब चीन क्यों परेशान है
अमेरिका के नए कदमों से यह पूरा सिस्टम टूट गया है। तेल का रास्ता बदलते ही चीन की कर्ज वसूली अटक गई है। वेनेजुएला पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब चीन के लिए भी हालात मुश्किल हो गए हैं। साफ है कि वेनेजुएला के तेल पर खेला जा रहा यह बड़ा दांव अब वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ले चुका है और इसका सबसे बड़ा झटका चीन को लगा है।