Delhi-Punjab face-off: दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े कथित छेड़छाड़ वाले वीडियो को लेकर दर्ज FIR ने सियासी विवाद को और गहरा कर दिया है। जालंधर में दर्ज इस मामले पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। वहीं पंजाब विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी बताया है, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनातनी साफ दिखने लगी है।
पंजाब स्पीकर का पक्ष
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि पंजाब पुलिस ने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री के आधार पर कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की है। उनके मुताबिक, कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की असंवैधानिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
विशेषाधिकार पर बहस
संधवां ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही को रिकॉर्ड से हटाया नहीं गया है, इसलिए विशेषाधिकार हनन का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी करेंगे और राजनीति से ऊपर उठकर कानूनी प्रक्रिया को चलने देना चाहिए।
यह भी देखेंःUS-Cuba tensions: US–क्यूबा तनाव चरम पर, ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय हलचल
दिल्ली स्पीकर का नोटिस
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जालंधर में दर्ज FIR को लेकर पंजाब के डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और स्पेशल डीजीपी साइबर सेल को नोटिस भेजा है। नोटिस में 48 घंटे के भीतर लिखित जवाब और सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है। उनका कहना है कि मामला विधानसभा की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।
फॉरेंसिक जांच
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि विवादित वीडियो को पारदर्शिता के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है और प्रकरण को विशेषाधिकार समिति के हवाले किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की आधिकारिक रिकॉर्डिंग को ‘डॉक्टर्ड’ बताना एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस मामले में दोषी पाई गई, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।