Bread Price Hike : पश्चिम बंगाल में ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। वेस्ट बंगाल बेकर्स एसोसिएशन ने ब्रेड के दाम बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद एक पाउंड ब्रेड की कीमत 32 रुपये से बढ़कर 36 रुपये हो गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कई बड़े ब्रेड ब्रांड अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा चुके हैं। चाय और ब्रेड पर निर्भर लाखों परिवारों को अब पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
क्यों लेना पड़ा फैसला?
बेकर्स एसोसिएशन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। आटा, चीनी और पैकेजिंग सामग्री के दाम तेजी से बढ़े हैं। एसोसिएशन के अधिकारियों के मुताबिक, काफी समय तक कीमतें स्थिर रखने की कोशिश की गई, लेकिन बढ़ती लागत के कारण अब यह संभव नहीं रह गया था। इसी वजह से ब्रेड के दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया।
कच्चे माल ने बढ़ाई मुश्किल
जानकारी के अनुसार, पिछले एक महीने में मैदे की कीमत करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गई है। वहीं चीनी का भाव लगभग 40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री की लागत भी बढ़ी है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों का असर परिवहन और पैकेजिंग खर्च पर पड़ा है, जिससे बेकरी कारोबारियों की लागत लगातार बढ़ रही है।
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पहले ही बढ़ चुके थे दाम
संगठित ब्रेड कंपनियां पहले ही अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। कई ब्रांड एक पाउंड स्लाइस ब्रेड की कीमत 36 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये तक कर चुके हैं। अब स्थानीय बेकरी संचालकों को भी नई कीमतों के अनुसार बिक्री करने की अनुमति मिल गई है। इससे बाजार में ब्रेड की कीमतों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।
दुकानदारों को मिला समय
बेकर्स एसोसिएशन ने राज्य के खुदरा विक्रेताओं और बेकरी संचालकों को नई कीमतों के अनुसार व्यवस्था बनाने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि बिना पूर्व सूचना कीमत बढ़ाने पर दुकानदारों को ग्राहकों के विरोध का सामना करना पड़ता है। इसलिए चरणबद्ध तरीके से नई दरें लागू की जा रही हैं ताकि बाजार में किसी तरह की परेशानी न हो।
आम लोगों पर असर
पश्चिम बंगाल में करीब 3,000 बेकरी संचालित हैं और लाखों लोग रोजमर्रा के नाश्ते में ब्रेड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर परिवारों के खर्च पर पड़ेगा। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में कमी नहीं आई तो आने वाले समय में अन्य बेकरी उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।