पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत ने सिर्फ देश की राजनीति नहीं बदली, बल्कि इसकी गूंज सीमा पार तक सुनाई दी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने 206 सीटों पर जीत दर्ज कर 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। यह नतीजा इतना बड़ा था कि पड़ोसी देशों के मीडिया में भी इसे प्रमुखता से कवर किया गया।
बांग्लादेशी मीडिया ने बताया बड़ी उपलब्धि
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार ने इस जीत को “बंगाल में बीजेपी की आंधी” बताते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की। अखबार ने लिखा कि यह जीत मोदी के लंबे शासनकाल की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बीजेपी ने पूर्वी भारत में अपने लंबे संघर्ष का अंत करते हुए सत्ता हासिल की है। बांग्लादेशी मीडिया में इस जीत को खासतौर पर इसलिए भी महत्व मिला क्योंकि चुनाव में घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
पाकिस्तानी अखबारों ने उठाए सवाल
पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन ने भी इस जीत को प्रमुखता से जगह दी। डॉन ने इसे विपक्ष के गढ़ में मोदी की रिकॉर्ड जीत बताया, लेकिन साथ ही मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर सवाल भी उठाए। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने इसे फर्जी वोटरों को हटाने की प्रक्रिया बताया, जबकि आलोचकों ने इसे पक्षपातपूर्ण करार दिया। साथ ही यह भी अंदेशा जताया गया कि इस जीत के बाद भारत की सीमा नीति और सख्त हो सकती है।
अमेरिकी मीडिया ने अलग नजरिया रखा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस चुनाव परिणाम को “हिंदू राष्ट्रवाद की बड़ी जीत” के रूप में पेश किया। रिपोर्ट में कहा गया कि बीजेपी ने विपक्ष के आखिरी मजबूत गढ़ को भी जीत लिया है। साथ ही यह भी लिखा गया कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद भारी बहुमत यह दिखाता है कि जनता बदलाव चाहती थी।
चुनावी मुद्दों का भी रहा असर
इस चुनाव में घुसपैठ, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। बीजेपी ने सीमा सुरक्षा और सख्त प्रशासन का वादा किया, जबकि राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए। यही वजह रही कि चुनाव परिणाम ने सभी को चौंका दिया और यह जीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव का संकेत भी बनी।
इसे भी पढ़ें : Defeated Mamata Banerjee: भवानीपुर में ममता बनर्जी पर भारी पड़े शुभेंदु अधिकारी, 15 हजार से ज्यादा वोटों से हार
सीमा पार क्यों बढ़ी बेचैनी
विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के बाद भारत की सीमा नीति और भी सख्त हो सकती है, जिसका असर सीधे पड़ोसी देशों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान की मीडिया में इस चुनाव को लेकर खास दिलचस्पी देखी गई।
वैश्विक राजनीति में भी बना मुद्दा
यह नतीजा सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया। अलग-अलग देशों के मीडिया ने इसे अपने नजरिए से देखा, लेकिन एक बात साफ रही कि बंगाल का यह चुनाव परिणाम वैश्विक सुर्खियों में छा गया।