AI Job Impact Research: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण कंपनियां ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही हैं। इस वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की जॉब जाने की आशंका बनी हुई है। अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि इसके कारण किन नौकरियों को सबसे अधिक खतरा है? लेकिन जब रिसर्चर्स ने यही सवाल एआई से पूछा, तो वे उसने अलग-अलग जवाब दिए। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी और अमेरिकन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पता चला है कि ओपनएआई के ChatGPT-5, गूगल डीपमाइंड के Gemini 2.5 और एंथ्रोपिक के Claude 4.5 ने अलग-अलग क्षेत्रों को हाइलाइट किया।
एआई टूल्स की ली थी मदद
आपको बता दें कि'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी और अमेरिकन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह जानने के लिए एआई टूल्स की मदद ली थी कि कौन सी नौकरियां ऑटोमेशन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। इस रिसर्च के लिए ओपनएआई के ChatGPT-5, गूगल डीपमाइंड के Gemini 2.5 और एंथ्रोपिक के Claude 4.5 जैसे दिग्गज एआई मॉडल्स का इस्तेमाल किया गया था। रिसर्चर्स ने पाया कि बड़े AI मॉडल्स ने वर्कफोर्स पर AI के असर को लेकर काफी अलग जवाब दिए।
एआई मॉडल्स के जवाबों में दिखा बड़ा अंतर
बता दें कि जहां एक एआई टूल ने किसी खास क्षेत्र को बहुत अधिक जोखिम वाला बताया, वहीं दूसरे टूल ने उसी क्षेत्र को कम जोखिम वाला माना। अकाउंटेंट्स, एडवरटाइजिंग मैनेजर्स और चीफ एग्जीक्यूटिव्स के पदों पर एआई मॉडल्स का आकलन अलग-अलग था। रिसर्चर्स का कहना है कि जो निष्कर्ष उन्होंने निकाला, वह AI बेस्ड “एक्सपोजर स्कोर” को लेकर अनिश्चितता दिखाता है।
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एआई के दावों को न मानें अंतिम सत्य
रिसर्चर्स का कहना है कि करियर से जुड़े बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लेते समय एआई की ओर से लगाए गए अनुमानों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी है कि लोगों को किसी एक नतीजे पर पहुंचने से पहले अलग-अलग एआई मॉडलों के परिणामों की तुलना करनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि उस क्षेत्र में एआई का कितना उपयोग किया जा रहा है।
जहां पहले से एआई का इस्तेमाल, वहां खतरा ज्यादा दिखाता है मॉडल
रिसर्चर्स ने अपने निष्कर्ष में एक प्रमुख बात पर ध्यान दिलाया है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले से ही एआई का अधिक उपयोग हो रहा है, उन क्षेत्रों को एआई अधिक जोखिम वाला बता सकता है। क्योंकि उन क्षेत्रों के लिए इंटरनेट पर एआई की ट्रेनिंग का बहुत सारा डेटा पहले से उपलब्ध है। मिली जानकारी के अनुसार फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ने एआई का इस्तेमाल बहुत पहले शुरू कर दिया था। ऐसे में हो सकता है कोई एआई मॉडल इसी पेशे को सबसे अधिक खतरे में बता दे। वहीं दूसरी ओर कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां फिलहाल एआई का इस्तेमाल कम है, लेकिन भविष्य में वह सबसे ज्यादा जोखिम में आ जाए।