पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद लोगों और देशों की सोने में दिलचस्पी कम नहीं हुई। साल 2025 में गोल्ड की डिमांड करीब 40 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 5,002 टन तक पहुंच गई। यह लगातार चौथा साल है, जब सोने की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2021 के बाद से अब तक गोल्ड डिमांड में करीब 292 टन का इजाफा हुआ है। डॉलर के हिसाब से देखें तो दुनिया ने सिर्फ एक साल में करीब 552 अरब डॉलर का सोना खरीदा, जो कई देशों की पूरी अर्थव्यवस्था से भी बड़ा आंकड़ा है।
ETF, बार और सिक्कों की जबरदस्त खरीद
पिछले साल गोल्ड ETF होल्डिंग में भी बड़ा उछाल आया। सालाना आधार पर इसमें 801 टन की बढ़ोतरी हुई, जो अब तक की दूसरी सबसे बड़ी बढ़त मानी जा रही है। वहीं सोने की ईंट और सिक्कों की मांग 1,374 टन रही, जो पिछले 12 सालों में सबसे ज्यादा है। इसका मतलब साफ है कि सिर्फ निवेशक ही नहीं, आम लोग भी सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। यह ट्रेंड बताता है कि दुनिया में अनिश्चितता का डर लगातार बढ़ रहा है।
केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीद
सबसे अहम बात यह है कि सोना सिर्फ आम लोग नहीं, बल्कि दुनिया के केंद्रीय बैंक भी तेजी से खरीद रहे हैं। साल 2025 में केंद्रीय बैंकों ने करीब 863 टन सोना खरीदा। यह किसी एक साल में चौथी सबसे बड़ी खरीद है। 2010 से 2021 के बीच जहां औसतन 473 टन सालाना खरीद होती थी, अब यह आंकड़ा लगभग दोगुना हो चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कई देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू कर दी है।
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चीन की गुपचुप गोल्ड खरीद पर सवाल
सबसे ज्यादा चर्चा चीन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन आधिकारिक तौर पर तो सिर्फ 27 टन सोना खरीदने की बात मानता है, लेकिन जानकारों का दावा है कि असल खरीद करीब 270 टन तक हो सकती है। यानी चीन चुपचाप बड़े पैमाने पर गोल्ड जमा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ऐसा ऐसे समय में कर रहा है, जब उसे आने वाले समय में किसी बड़े आर्थिक या भू-राजनीतिक संकट का अंदेशा है। यही वजह है कि उसकी रणनीति दुनिया को चिंता में डाल रही है।
अमेरिका अब भी सबसे आगे
गोल्ड रिजर्व के मामले में अभी भी अमेरिका सबसे आगे है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के पास करीब 8,133 टन सोना है। खास बात यह है कि अमेरिका ने कई सालों से अपने गोल्ड रिजर्व में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसके बाद जर्मनी, इटली, फ्रांस और रूस जैसे देश आते हैं। चीन 2,304 टन के साथ छठे स्थान पर है, यानी अमेरिका से अभी भी काफी पीछे है।
बढ़ता गोल्ड स्टॉक क्या खतरे का संकेत
भारत, चीन, तुर्की और पोलैंड जैसे देश लगातार सोना खरीद रहे हैं। भारत के पास भी करीब 880 टन गोल्ड रिजर्व है। सवाल यह है कि जब दुनिया भर के देश सोने की ओर भाग रहे हैं, तो क्या यह आने वाले किसी बड़े संकट का इशारा है। अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा झटका आता है, तो जिन देशों ने सोना जमा किया है, उन्हें सुरक्षा मिलेगी। लेकिन जिनकी तैयारी कमजोर है, उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। यही वजह है कि चीन की गुपचुप गोल्ड रणनीति को हल्के में नहीं लिया जा रहा।