Paper Leak Reasons In India: देश में आए दिन पेपर लीक का विषय चर्चा में रहता है। इस बड़ी समस्या को रोकने के लिए एक कड़े कानून की जरूरत है। लेकिन क्यों हमेशा 'एंटी पेपर लीक' कानून सिर्फ फाइलों और भाषणों तक ही सीमित रह जाता है? आइए आपको हम बताते हैं कि परीक्षा प्रणाली की प्रक्रिया में कहां-कहां दिक्कतें हैं।
पेपर लीक कानून
देखा जाए तो देश में पेपर लीक रोकने के लिए कई कानून हैं। राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने अपने प्रदेश में गैर-जमानती धाराओं और संपत्ति कुर्क करने तक के कठोर कानून बनाए हुए हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने भी पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू किया है, जिसमें 10 साल की जेल और 1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन ये कानून केवल कागजों पर ही ज्यादा प्रभावी दिखते हैं। धरातल पर इन कानूनों का कोई डर नहीं दिखता। आए दिन पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं।
राधाकृष्णन की कमेटी का रोडमैप तैयार
नीट पेपर लीक के विवाद के बाद अब केंद्र सरकार ने इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अगुवाई में एक हाईलेवल कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का काम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के मूल ढांचे में जरूरी सुधार करना है। कमेटी ने अपने रोडमैप में एनटीए के पुनर्गठन, डेटा सुरक्षा को फुल-प्रूफ बनाने और हाइब्रिड मॉडल जैसे ऑनलाइन और ऑफलाइन को अपनाने का सुझाव दिया है। कमेटी का ये मानना है कि जबतक एग्जाम सिस्टम का इंफ्रास्ट्र्क्चर सरकार के जिम्मे नहीं होगा, तब तक ये सेंधमारी बंद नहीं हो सकती।
ये हैं पेपर लीक होने के बड़े कारण
परीक्षा संस्थाओं के पास अपना खुद का इनफ्रास्ट्रक्चर न होना इस सेंधमारी का प्रमुख कारण हैं। परीक्षा का काम प्राइवेट कंप्यूटर लैब्स, निजी प्रिंटिंग प्रेस और प्राइवेट वेंडर्स को आउटसोर्स कर दिया जाता है। यही भारी कमी इस लूप होल का कारण बनती है।
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सजा देने की दर बेहद कम
भारत में सजा देने की दर बेहद कम है। यहां एफआईआर दर्ज होना तो आसान है, लेकिन मामले की सुनवाई और दोष सिद्ध होने में ही सालों बीत जाते हैं। इसी कारण अपराधियों में कानून का डर समाप्त हो गया है। हमारे समाज में कंपिटशन इतना ज्यादा है कि लोग कामयाबी पाने के लिए किसी भी हद तक जाने से नहीं चूंकते। अगर पैसा होतो वह पेपर खरीदने तक को तैयार हो जाते हैं। साथ ही कोचिंग माफिया भी इस सेंधमारी में बराबर का हिस्सेदार माना जाता है।
ये कदम उठाने से दूर हो सकती है समस्या
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल सख्त सजा का डर दिखाकर पेपर लीक की समस्या हल नहीं हो सकती। इसके लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाना भी आवश्यक है। जैसे एनक्रिप्टेड डिजिटल एग्जाम पेपर सीधे एग्जाम हॉल में प्रिंट कराए जाएं। साथ ही रियल टाइम ट्रैकिंग और बायोमीट्रिक की जाए। यानी चप्पे-चप्पे की सघन निगरानी की जाए। इसके अलावा पेपर लीक के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं और जल्द से जल्द फैसला आए।