जब भारत में रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव में है, तब ओमान की करेंसी पूरी दुनिया को चौंका रही है। ओमानी रियाल आज दुनिया की सबसे मजबूत मुद्राओं में गिनी जाती है। मौजूदा समय में एक ओमानी रियाल की कीमत करीब 235 भारतीय रुपये के बराबर है। यही नहीं, यह अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा मजबूत है, जहां एक रियाल लगभग 2.60 डॉलर के बराबर आता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओमान दौरे के साथ ही यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर एक छोटा सा खाड़ी देश अपनी मुद्रा को इतना ताकतवर कैसे बनाए हुए है।
तेल गैस और स्थिर अर्थव्यवस्था की ताकत
ओमानी रियाल की मजबूती की सबसे बड़ी वजह देश की स्थिर अर्थव्यवस्था है। ओमान के पास तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा भंडार है, जो उसकी कमाई की मजबूत रीढ़ है। ऊर्जा संसाधनों से होने वाली लगातार आय सरकार को आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसके साथ ही ओमान के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी है, जिससे उसकी करेंसी पर बाहरी दबाव कम रहता है। जब किसी देश की आय स्थिर हो और खर्च नियंत्रण में हो, तो उसकी मुद्रा अपने आप मजबूत बनी रहती है।
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कम आबादी, ज्यादा आय का सीधा फायदा
ओमान की आबादी करीब 55 लाख है, जो भारत जैसे देशों की तुलना में बेहद कम है। कम आबादी का सीधा मतलब है ज्यादा प्रति व्यक्ति आय। जब देश के नागरिकों की औसत कमाई ज्यादा होती है, तो सरकार पर सामाजिक और आर्थिक बोझ भी कम रहता है। यही वजह है कि ओमान अपनी मुद्रा को डॉलर से जोड़कर भी स्थिर रख पाता है। कम आबादी और ज्यादा कमाई का यह संतुलन ओमानी रियाल को गिरने से बचाता है और उसे दुनिया की मजबूत करेंसीज में शामिल करता है।
भारत-ओमान व्यापार और मजबूत रिश्ता
भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्ते भी काफी मजबूत हैं। भारत ओमान से कच्चा तेल, एलएनजी, यूरिया और पेट्रोलियम कोक आयात करता है, जो देश के ऊर्जा और उर्वरक सेक्टर के लिए अहम हैं। वहीं भारत ओमान को मिनरल फ्यूल, केमिकल, आयरन स्टील, अनाज, मशीनरी, कपड़े और खाद्य उत्पाद निर्यात करता है। करीब 7.8 लाख भारतीय ओमान में रहकर वहां की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। मजबूत व्यापार, स्थिर नीति और संसाधनों की भरपूर उपलब्धता ने मिलकर ओमानी रियाल को वह ताकत दी है, जिसके सामने आज डॉलर भी कई बार कमजोर नजर आता है।