NMC Georgia MBBS Guidelines: विदेश से मेडिकल (MBBS) की पढ़ाई करने का सपना देख रहे भारतीय छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन के अलग-अलग बयानों और अस्पष्ट रुख के कारण छात्रों के बीच भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इस असमंजस का फायदा उठाकर कथित एजुकेशन कंसल्टेंट और एजेंट छात्रों को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
भारत के बाहर किसी भी विदेशी मेडिकल कॉलेज से MBBS करने के बाद भारत में प्रैक्टिस करने के लिए छात्रों को FMGE पास करना अनिवार्य होता है। हाल ही में दो छात्रों ने प्रधानमंत्री ग्रीवांस पोर्टल पर एक जैसा सवाल पूछा, क्या जॉर्जिया से 6 साल का MBBS कोर्स करने के बाद छात्र भारत में FMGE परीक्षा देने के लिए योग्य होंगे?
NMC ने 2021 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी डिग्री तभी मान्य होगी, जब पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद वह देश छात्र को स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का लाइसेंस देता हो। NMC ने अपना रुख बदल दिया और कहा कि स्वतंत्र लाइसेंस वाली शर्त की जांच एक विशेषज्ञ समिति कर रही है। जब एक अन्य छात्र ने पूछा कि दोनों में से कौन सा जवाब सही है, तो आयोग ने फिर से पुराना नियम ही दोहरा दिया।
कंसल्टेंट्स कैसे कर रहे हैं गुमराह
अदालत ने कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसी अस्पष्टता का फायदा उठाकर मोटा कमीशन कमाने वाले एजेंट छात्रों को दूसरा वाला जवाब दिखा रहे हैं। वे छात्रों को भरोसा दिला रहे हैं कि स्वतंत्र लाइसेंस वाली शर्त जल्द ही हट जाएगी। कानूनी जानकारों का कहना है कि NMC खुद अकेले कानून में बदलाव नहीं कर सकता है। एजेंटों के झूठे वादों में आकर छात्र अपना कीमती समय और लाखों रुपये जोखिम में डाल रहे हैं।
जॉर्जिया के नियमों से भी बढ़ा भ्रम
जॉरिज्या की संस्था का दावा है कि उनका कोर्स भारत के नियमों के अनुकूल है। लेकिन उनके खुद के नियम कहते हैं कि वहां से पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्र केवल जूनियर डॉक्टर के तौर पर किसी सीनियर डॉक्टर की देखरेख में काम कर सकते हैं, उन्हें स्वतंत्र प्रैक्टिस की अनुमित नहीं मिलती। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक NMC का नियम साफ है कि पढ़ाई वाले देश में स्वतंत्र लाइसेंस मिलना जरूरी है। ऐसे में जॉर्जिया का यह नियम भारतीय छात्रों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
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क्या उठ रही है मांग
इस पूरी स्थिति को देखते हुए कानूनों विशेषज्ञों और वकीलों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से मांग की है कि NMC तुरंत इस मामले पर एक स्पष्ट और आधिकारिक बयान जारी करे। उन विदेशी यूनिवर्सिटीज की एक प्रमाणिक सूची जारी की जाए, तो भारत के सभी नियमों और पात्रता शर्तों को पूरी तरह पूरा करती हैं, ताकि छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बच सके।