Harivansh become Deputy Chairman: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। दो बार राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हरिवंश के सामने अब तीसरी बार इस पद पर वापसी का मौका है। सवाल यह है कि मनोनीत सदस्य होने के बावजूद क्या वे फिर इस पद के लिए चुने जा सकते हैं।
मनोनीत सदस्य के अधिकार
संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा के सदस्य को निर्वाचित सांसदों के समान ही अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। हरिवंश नारायण सिंह जैसे सदस्य सदन में मतदान कर सकते हैं और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी हिस्सा ले सकते हैं, हालांकि वे राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकते।
संवैधानिक रोक नहीं
संविधान के अनुच्छेद 89(2) के तहत राज्यसभा अपने किसी भी सदस्य को उपसभापति चुन सकती है। इसका मतलब है कि हरिवंश नारायण सिंह के लिए इस पद पर तीसरी बार चुने जाने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। हालांकि अब तक कोई मनोनीत सदस्य इस पद तक नहीं पहुंचा है, जिससे यह मामला और दिलचस्प हो जाता है।
बहुमत का गणित
राज्यसभा उपसभापति के पद के लिए चुनाव कराया जाएगा, क्योंकि उनका पिछला कार्यकाल समाप्त हो चुका है। चुनाव की तारीख सभापति तय करते हैं और सामान्य बहुमत से परिणाम तय होता है। इस चुनाव में केवल राज्यसभा के सदस्य ही मतदान करते हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं।
बढ़ेगा मुकाबला
सूत्रों के मुताबिक, इस बार विपक्ष भी अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। पहले भी Harivansh Narayan Singh ने विपक्षी उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की थी। अब देखना होगा कि क्या वे तीसरी बार भी इस पद पर काबिज हो पाते हैं या राजनीतिक समीकरण बदलते हैं।