CBSE Three-Language Policy: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर शुरू हुए विवाद के बाद सीबीएसई ने इस पॉलिसी में कई बदलाव किए थे, बताया गया था कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में आने वाले साल में तीसरी भाषा का एग्जाम नहीं देना होगा। अब सीबीएसई की ओर से कुछ और नए सवालों के भी जवाब दिए गए है। इन सवालों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सीबीएसई ने कई तरह के भ्रमों को साफ किया है।
क्या 10वीं में देनी होगी तीसरी भाषा की परीक्षा
सीबीएसई ने बताया है कि कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का एग्जाम और मूल्यांकन इंटरनल असेसटमेंट के तौर पर होगा। यानी स्कूल के टीचर ही मूल्यांकन करेंगे। इसके बाद जब छात्र 10वीं में जाएंगे तो उन्हें तीसी भाषा के लिए कोई बोर्ड एग्जाम नहीं देना होगा, लेकिन तीसरी भाषा में पास होना आवश्यक होगा।
तीसरी भाषा में फेल हुआ छात्र तो क्या होगा
सीबीएसई की तरफ से बताया गया है कि सीबीएसई पास सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए छात्र को कक्षा 10वीं में स्कूल स्तर के इस मूल्यांकन में पास होना आवश्यक होगा। अगर कोई छात्र कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा में फेल हो जाता है, तो उसे कक्षा 10वीं में प्रमोट किया जाएगा। हालांकि, छात्र को क्लास 10th की पढ़ाई के दौरान ही कक्षा 9वीं की तीसरी भाषा की परीक्षा पास करनी होगी। अगर कोई छात्र कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा में पास नहीं होता, तो परीक्षा परिणाम घोषितहोने से पहले स्कूल की तरफ से उस छात्र की दोबारा परीक्षा कराई जाएगी।
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7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए क्या रहेगा प्रोसेस
जब छात्र 7वीं और 8वीं पास करके 9वीं और 10वीं कक्षा में पहुंचेंगे, तब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें दो भाषाएं भारतीय होंगी। लेकिन यदि किसी छात्र ने पहले ही दो गैर-भारतीय भाषाएं चुनी हैं, तो उन्हें तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा को पढ़ना होगा और इनके लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसके अलावा कक्षा छठी में पढ़ने वाले छात्रों को आने वाले सभी बैचों के लिए दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। जब ये बैच आगे चलकर कक्षा 10वीं में पहुंचेगा, तब इन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी।