दिल्ली देश की राजधानी है, लेकिन नए साल 2026 की शुरुआत के साथ यहां से आ रही कुछ खबरें लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, साल के शुरुआती दिनों में ही सैकड़ों गुमशुदगी की शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं, बच्चियों और युवतियों की है। पुलिस यह जरूर कहती है कि कई लोग बाद में सुरक्षित मिल जाते हैं, लेकिन इन घटनाओं ने महिलाओं और उनके परिवारों के मन में डर पैदा कर दिया है। ऐसे माहौल में सतर्क रहना और पहले से तैयारी रखना बेहद जरूरी हो गया है।
मोबाइल बन सकता है सबसे बड़ा सुरक्षा हथियार
आज लगभग हर लड़की और महिला के पास स्मार्टफोन है। यही फोन मुश्किल वक्त में आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उसमें सही सेफ्टी ऐप्स और फीचर्स पहले से चालू हों। आपात स्थिति में फोन निकालकर नंबर ढूंढने का वक्त नहीं मिलता, इसलिए जरूरी है कि मदद एक बटन दबाते ही मिल सके।
112 इंडिया और Himmat Plus क्यों जरूरी
112 इंडिया ऐप सरकार का इमरजेंसी ऐप है। इसमें एक बटन दबाते ही पुलिस, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड को आपकी लाइव लोकेशन के साथ अलर्ट चला जाता है। कॉल न कर पाने की हालत में भी मदद मिल सकती है। वहीं Himmat Plus ऐप खास तौर पर महिलाओं के लिए बनाया गया है। इसमें SOS बटन, वॉयस कमांड और बिना फोन छुए मदद मांगने जैसे फीचर्स हैं। दिल्ली में रहने वाली हर महिला को यह ऐप जरूर रखना चाहिए।
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फोन का इन-बिल्ट SOS फीचर जरूर ऑन करें
बहुत से लोग नहीं जानते कि उनके फोन में पहले से SOS फीचर होता है। पावर बटन को 3 या 5 बार दबाने पर 112 पर कॉल लग जाती है और आपके चुने हुए कॉन्टैक्ट्स को लाइव लोकेशन के साथ मैसेज चला जाता है। कुछ फोन में ऑटो ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू हो जाती है। आज ही फोन की सेटिंग्स में जाकर इसे चालू करें।
लाइव लोकेशन शेयर करने की आदत डालें
अगर आप अकेले सफर कर रही हैं या देर रात घर लौट रही हैं, तो अपनी लाइव लोकेशन परिवार या दोस्त के साथ शेयर करें। Google Maps, WhatsApp और iPhone के Find My जैसे फीचर्स से यह बहुत आसान है। इससे आपके अपनों को हर पल पता रहता है कि आप कहां हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सकती है।
छोटी सावधानियां, बड़ा फायदा
कैब या ऑटो में बैठते समय ड्राइवर की जानकारी जरूर मिलाएं और ट्रिप स्टेटस शेयर करें। बैग में तेज आवाज वाला सेफ्टी अलार्म रखें। जूते या पर्स में छोटा ट्रैकर भी मददगार हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को भी SOS फीचर और इमरजेंसी नंबर इस्तेमाल करना सिखाएं। याद रखें, डरने से नहीं, बल्कि तैयारी करने से सुरक्षा मिलती है। मोबाइल सही तरह से इस्तेमाल किया जाए, तो वह हर लड़की के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है।