वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार बड़े आर्थिक कदमों पर विचार करती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दो दिनों की संयम बरतने वाली अपील के बाद अब कैबिनेट बैठक पर सबकी नजरें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और ईंधन खपत कम करने के लिए कई बड़े फैसले ले सकती है।
वर्क फ्रॉम होम पर फिर शुरू हुई चर्चा
कोविड काल में अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। NASSCOM ने भी ईंधन बचत के लिए हाइब्रिड और वर्क फ्रॉम होम मॉडल को समर्थन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़ी कंपनियां फिर से घर से काम की व्यवस्था अपनाती हैं तो इससे ट्रैफिक और पेट्रोल-डीजल की खपत दोनों में कमी लाई जा सकती है।
सरकार पहले ही उठा चुकी है कई कदम
सरकार ने हाल के दिनों में कई संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री के काफिले का आकार कम किया गया है, कई मंत्रालयों में सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को सीमित किया गया है और विदेशी दौरों में कटौती की बात भी सामने आई है। इसके अलावा सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
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मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी चिंता
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिख रहा है। Strait of Hormuz में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या हो सकते हैं अगले बड़े फैसले
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार आने वाले दिनों में वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा देने, सरकारी खर्चों में कटौती, विदेशी यात्राओं पर सख्ती और लक्जरी खर्च सीमित करने जैसे कदम उठा सकती है। हालांकि अभी तक किसी बड़े प्रतिबंध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और आर्थिक बचत पर जोर बढ़ाने जा रही है।