दुनिया में आमतौर पर अमेरिका, चीन और भारत को सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में देखा जाता है, लेकिन स्थिरता के मामले में तस्वीर कुछ और ही है। हाल ही में आई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की टॉप 10 सबसे मजबूत और स्थिर इकॉनमी में इन तीनों का नाम शामिल नहीं है। इस लिस्ट में पहले नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई है, जिसने आर्थिक मजबूती के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है।
यूएई सबसे आगे, यूरोप और एशिया का दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार यूएई के बाद स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड और सऊदी अरब टॉप 10 में शामिल हैं। खास बात यह है कि दुनिया की बड़ी इकॉनमी में से सिर्फ जर्मनी और जापान ही इस टॉप 10 लिस्ट में जगह बना पाए हैं। जर्मनी दुनिया की तीसरी और जापान पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, फिर भी दोनों की पहचान यहां स्थिरता के कारण बनी है।
अमेरिका और चीन कहां खड़े हैं
दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका इस रैंकिंग में 13वें नंबर पर है। उससे आगे नॉर्वे 11वें स्थान पर है। वहीं, चीन जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इस लिस्ट में 19वें नंबर पर पहुंच पाया है। इसके अलावा ब्रिटेन 16वें, फ्रांस 20वें और साउथ कोरिया 23वें स्थान पर है। इससे साफ है कि बड़ी अर्थव्यवस्था होना और आर्थिक रूप से सबसे मजबूत होना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं।
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यूरोप के देशों की मजबूत मौजूदगी
इस लिस्ट में यूरोप के कई देशों ने मजबूत पकड़ बनाई है। ऑस्ट्रिया 15वें, फिनलैंड 17वें, स्पेन 25वें, इटली 28वें और चेक गणराज्य 33वें स्थान पर है। रूस 31वें और तुर्की 44वें नंबर पर है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि स्थिर नीतियां, मजबूत सिस्टम और संतुलित विकास किसी भी देश की असली ताकत बनते हैं।
भारत की रैंकिंग ने चौंकाया
आर्थिक रूप से सबसे मजबूत देशों की इस लिस्ट में भारत 47वें नंबर पर है। यह इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकॉनमी है और सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इसके बावजूद स्थिरता के मामले में भारत कई छोटे और मध्यम देशों से पीछे नजर आता है।
भारत से पीछे कौन-कौन से देश
हालांकि इस लिस्ट में भारत कई देशों से आगे भी है। ब्राजील, मिस्र, मेक्सिको, अर्जेंटीना, साउथ अफ्रीका, ईरान, कजाकस्तान, बांग्लादेश, केन्या और यूक्रेन जैसे देश भारत से नीचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तेज ग्रोथ एक बड़ा प्लस है, लेकिन स्थिरता के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक संतुलन और दीर्घकालिक नीतियों पर और काम करने की जरूरत है।