Yashvir Singh Javelin Silver Medal : एशियन गेम्स 2026 में नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। पुरुष भाला फेंक स्पर्धा में भारत ने एक साथ दो पदक जीतकर अपनी ताकत साबित कर दी। हरियाणा के यशवीर सिंह ने सिल्वर मेडल हासिल किया, जबकि उत्तर प्रदेश के रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इस प्रदर्शन ने दिखा दिया कि भारतीय जैवलिन थ्रो अब सिर्फ एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है।
यशवीर ने बनाया पर्सनल बेस्ट
24 वर्षीय यशवीर सिंह ने फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 85.72 मीटर का थ्रो किया। यह उनके करियर का पर्सनल बेस्ट भी रहा। मुकाबले के शुरुआती दौर में वह बढ़त बनाए हुए थे और लगातार पदक की दौड़ में बने रहे। आखिरी प्रयास में शानदार थ्रो के दम पर उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।
रोहित यादव ने भी दिलाया मेडल
रोहित यादव ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 84.35 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। एक समय वह प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए थे। पूरे मुकाबले में रोहित ने जबरदस्त प्रतिस्पर्धा दिखाई और आखिर में ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे। भारत के लिए एक ही स्पर्धा में दो पदक आना एथलेटिक्स दल के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
श्रीलंका के खिलाड़ी ने मारी बाजी
गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे के नाम रहा। शुरुआती तीन प्रयासों के बाद वह तीसरे स्थान पर थे, लेकिन चौथे प्रयास में 88.33 मीटर का थ्रो कर उन्होंने मुकाबले का रुख बदल दिया। इसके बाद आखिरी प्रयास में 88.55 मीटर का थ्रो कर उन्होंने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।
अरशद नदीम का नहीं चला जादू
पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अरशद नदीम इस बार पदक जीतने में नाकाम रहे। छह प्रयासों में उनके सिर्फ दो थ्रो वैध रहे। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 80.29 मीटर का रहा, जिसके साथ वह चौथे स्थान पर रहे। पूरे मुकाबले में वह अपनी लय हासिल नहीं कर सके और मेडल से चूक गए।
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नीरज के बिना भी मजबूत दिखा इंडिया
नीरज चोपड़ा चोट के कारण एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं ले सके, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने उनकी कमी महसूस नहीं होने दी। यशवीर सिंह और रोहित यादव के पदकों ने साबित कर दिया कि इंडिया के पास जैवलिन थ्रो में मजबूत प्रतिभाओं की नई फौज तैयार हो चुकी है। यही वजह है कि एशियाई मंच पर भारत का दबदबा लगातार कायम दिखाई दे रहा है।