उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं मिले हैं। इस देरी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। हालिया विस्तार में कुल 8 नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इनमें कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार मंत्री और राज्य मंत्री शामिल हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि किस नेता को कौन सी जिम्मेदारी मिलेगी।
नए चेहरों पर सबसे ज्यादा मंथन
मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नेताओं में भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को पदोन्नति मिली है। सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा माथापच्ची इन्हीं नए चेहरों को विभाग देने को लेकर हो रही है। सरकार और संगठन दोनों स्तर पर लगातार विचार-विमर्श चल रहा है ताकि राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाया जा सके।
विभाग बदलने पर भी चर्चा
मामला सिर्फ नए मंत्रियों को विभाग देने का नहीं है बल्कि कई मौजूदा विभागों में फेरबदल की संभावना भी बताई जा रही है। यही वजह है कि फैसला लंबा खिंचता नजर आ रहा है। सूत्रों की मानें तो सरकार केवल जिम्मेदारी नहीं बांटना चाहती बल्कि आगे की राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखकर फैसले करना चाहती है।
ये भी पढ़ें : तेल संकट का असर शुरू! Petrol-Diesel और CNG महंगे, पंपों पर लगी लंबी कतारें
अमित शाह से मुलाकात के बढ़े मायने
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात चर्चा का बड़ा विषय बन गई। माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे को लेकर शीर्ष नेतृत्व स्तर पर भी राय ली जा रही है। ऐसी अटकलें हैं कि कुछ विभागों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है, जिस कारण यह प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय ले रही है।
2027 चुनाव पर भी नजर
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विभागों का बंटवारा सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा भी है। क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई जा रही है। भाजपा कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिससे आने वाले चुनावी समीकरण प्रभावित हों।
अब घोषणा का इंतजार
फिलहाल सभी निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हुई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि दिल्ली से लौटने के बाद विभागों को लेकर अंतिम फैसला सामने आ सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा लगातार तेज है कि कौन सा चेहरा बड़ी जिम्मेदारी पाएगा और किन विभागों में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।