वेस्ट यूपी इन दिनों सियासी हलचल के केंद्र में है। वजह है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अचानक तेज हुआ एक्शन। झुग्गी बस्तियों में दस्तावेज जांच, नगर निकायों को संदिग्ध लोगों की पहचान का आदेश और SIR प्रक्रिया को लेकर सख्त निर्देश ये सब मिलकर संकेत दे रहे हैं कि योगी इस बार किसी भी स्तर पर कोई चूक नहीं होने देना चाहते। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई की कमान भी उन्होंने खुद संभाल ली है। इससे मुस्लिम इलाकों में हलचल बढ़ी है और विपक्ष को भी साफ संदेश मिल चुका है कि 2027 की तैयारी समय से पहले शुरू हो चुकी है।
SIR पर योगी का कड़ा रुख
अलीगढ़ कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक में योगी ने दो टूक कहा कि SIR यानी मतदाता सूची शुद्धिकरण सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता का मूल आधार है। मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में गलत तरीके से नाम जोड़ने की शिकायतों के बाद उन्होंने नेताओं और अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का आदेश दिया। बूथ-वार रिपोर्ट उन्होंने खुद देखी और कहा कि विपक्ष खामोशी से अपने समर्थकों के नाम जोड़ने में लगा है। यही वजह है कि वेस्ट यूपी में SIR पहली बार इतनी कड़ी निगरानी में किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की राजनीति अचानक गर्म हो गई है।
घुसपैठियों पर CM का सीधा वार
'योगी की पाती' नाम से जारी सार्वजनिक संदेश में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि यूपी में कोई भी अवैध विदेशी नहीं बचेगा। उनके आदेश पर सभी नगर निकायों को संदिग्ध लोगों की सूची बनाने को कहा गया है। पुलिस, प्रशासन और इंटेलिजेंस टीमें दस्तावेज खंगाल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कि घुसपैठियों के लिए लाल कालीन नहीं बिछाई जा सकतीका हवाला देते हुए योगी ने हर मंडल में डिटेंशन सेंटर बनाने, जांच पूरी होने पर ऐसे व्यक्तियों को वहां भेजने और आगे की कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है। सबसे अधिक दवाब इस समय वेस्ट यूपी में दिख रहा है।
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विपक्ष परेशान, BJP बोली- यह सुरक्षा और पारदर्शिता का मुद्दा
योगी के इस डबल-एक्शन मोड के बाद विपक्ष खुलकर हमलावर हो गया है। कुछ दल सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी जांच अभी क्यों की जा रही है। वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षा और पारदर्शिता का अभियान है, जिसमें किसी को परेशान करने का उद्देश्य नहीं। पर जमीन पर माहौल यही संकेत दे रहा है कि कार्रवाई जितनी तेज हो रही है, राजनीति उतनी ही गर्म हो रही है। कई नेताओं के बयान सोशल मीडिया पर वायरल हैं, और वेस्ट यूपी आने वाले दिनों में देश की सियासी दिशा तय कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि योगी के इन कदमों का आगे क्या असर होगा और किसकी रणनीति सफल साबित होगी।